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नियमित टà¥à¤°à¥ˆà¤•िग कर नवजात की मौत को कम करेगा विà¤à¤¾à¤—
दो किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® व इससे कम वजन वाले बचà¥à¤šà¥‡, 37 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ से पहले जनà¥à¤®à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ और जनà¥à¤® के पहले दिन ठीक से दूध नहीं पीने वाले नवजात की होगी बेहतर देखà¤à¤¾à¤²
तीन शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के शिशॠका विशेष खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखना है जरूरी, कमजोर शिशà¥à¤“ं की बेहतर देखà¤à¤¾à¤² से नवजात मृतà¥à¤¯à¥ दर में कमी संà¤à¤µ, विà¤à¤¾à¤— ने आंकड़े कम करने को ठाना संवाद सहयोगी, लखीसराय : बिहार में à¤à¤• हजार जनà¥à¤®à¥‡ शिशà¥à¤“ं में 28 नवजात की मृतà¥à¤¯à¥ जनà¥à¤® के 28 दिनों के à¤à¥€à¤¤à¤° हो जाती है। मरने वाले नवजात शिशà¥à¤“ं की संखà¥à¤¯à¤¾ का à¤à¤• तिहाई हिसà¥à¤¸à¤¾ उन शिशà¥à¤“ं का होता है जो बहà¥à¤¤ 37 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ से पहले पैदा होते हैं। इसकी जीवन सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ को लेकर सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ विà¤à¤¾à¤— ने तीन शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के शिशà¥à¤“ं के लिठनियमित टà¥à¤°à¥ˆà¤•िग वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की है। ताकि नवजात शिशà¥à¤“ं की होने वाली मौत के आंकड़े को कम किया जा सके। यदि समय पर कम वजन वाले शिशà¥à¤“ं की पहचान कर उसकी सही देखà¤à¤¾à¤² की जाती है तो उसके जीवित रहने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बहà¥à¤¤ अधिक बढ़ जाती है। सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤–ंडों में आशा, à¤à¤à¤¨à¤à¤® व आंगनबाड़ी सेविकाओं की मदद से à¤à¤¸à¥‡ शिशà¥à¤“ं की लगातार टà¥à¤°à¥ˆà¤•िग की जाà¤à¤—ी। केयर इंडिया के टीम लीड नवेदउर रहमान ने यह जानकारी दी।
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à¤à¤¸à¥‡ करें कमजोर नवजात शिशॠकी पहचान वैसे शिशॠजिनका वजन दो किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® से नीचे हैं, वे कमजोर वजन वाले नवजात शिशॠकी शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में आते हैं। यदि नवजात जनà¥à¤® से मां का दूध नहीं पी पा रहा है तो ये कमजोर शिशॠहोते हैं। साथ ही समय से पूरà¥à¤µ जनà¥à¤® लेने वाले नवजात कमजोर होते हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बोलचाल की à¤à¤¾à¤·à¤¾ में सतमसà¥à¤µà¤¾ या अठमसà¥à¤† à¤à¥€ कहा जाता है। à¤à¤¸à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ सात या आठमाह में ही जनà¥à¤® ले लेते हैं।
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आशा व à¤à¤à¤¨à¤à¤® फोन पर लेती है नवजात की जानकारी à¤à¤¸à¥‡ शिशॠको चिहà¥à¤¨à¤¿à¤¤ करके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ विà¤à¤¾à¤— व केयर इंडिया के सà¥à¤ªà¤°à¤µà¤¿à¤œà¤¨ में उसके जनà¥à¤® से तीस दिन तक नियमित रूप से शिशॠके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की जानकारी ली जाती है। आशा व à¤à¤à¤¨à¤à¤® पहले सात दिनों तक रोजाना बचà¥à¤šà¥‡ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥ की जानकारी फोन कर लेती हैं। पहला दिन, तीसरा दिन, सातवां दिन, 14वें दिन, 21वें दिन और 42वें दिन कमजोर नवजात शिशॠके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की जानकारी फोन कर माता-पिता से ली जाती है। इसके लिठहर पà¥à¤°à¤–ंड के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ केंदà¥à¤° पर जहां शिशॠका जनà¥à¤® हà¥à¤†, à¤à¤• रजिसà¥à¤Ÿà¤° होता है जिसमें उस बचà¥à¤šà¥‡ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की जानकारी की रिपोरà¥à¤Ÿ लिखी होती है। इस तरह कमजोर वजन वाले नवजात शिशॠकी टà¥à¤°à¥ˆà¤•िग कर शिशà¥à¤“ं की मृतà¥à¤¯à¥ दर को रोकने का काम किया जा रहा है।
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नवजात सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ नहीं कर रहा तो लें आशा की मदद कमजोर नवजात सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ नहीं कर पा रहा है तो à¤à¤¸à¥‡ में आशा या सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯à¤•रà¥à¤®à¥€ से मिलकर यह बात जरूर बताà¤à¤‚। आधà¥à¤¨à¤¿à¤• विधि से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने के बारे में जानकारी लें। राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ परिवार सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ चार की रिपोरà¥à¤Ÿ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• जिला में 39.2 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बचà¥à¤šà¥‡ ही à¤à¤• घंटा के अंदर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कर पाते हैं। पà¥à¤°à¤¸à¥‚ता के लिठजरूरी है कि बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के बाद à¤à¤• घंटे के अंदर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराà¤à¤‚। मां का पहला पीला गाढ़ा दूध बचà¥à¤šà¥‡ में रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को विकसित करता है। नवजात शिशॠको नियमित छह माह तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराना जरूरी है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ शिशॠको डायरिया और निमोनिया जैसी गंà¤à¥€à¤° रोगों से बचाता है। मां का दूध ही शिशॠका सरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® आहार है। इसको देखते हà¥à¤ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ को बोतल दूध मà¥à¤•à¥à¤¤ बनाने का कवायद जारी है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ को बढ़ावा देने के लिठबà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ फीडिग सेंटर à¤à¥€ बनाठगठहैं।
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